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मध्यप्रदेश में हर व्यक्ति 1244 रुपए का कर्जदार, 2 साल में शिवराज सरकार ने लिया 93353 करोड़ का कर्ज

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भोपाल। प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर 2020 का 72 दिन का लॉकडाउन और 2021 में 40 दिन चला कोरोना कर्फ्यू भारी रहा। वित्तीय व्यवस्था इस कदर चरमराई कि सरकार को कोरोना से लोगों के इलाज, बिजली और कर्मचारियों के वेतन भत्तों के लिए 93,353 करोड़ रुपए कर्ज लेना पड़ा। आमदनी से 21 हजार करोड़ रुपए ज्यादा खर्च हो गए। इसकी बड़ी वजह केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी की राशि में कमी आना है। राज्य के स्वयं के करों का अनुमान गड़बड़ा गया। यह पहला मौका है जब किसी साल में प्रदेश का हर एक व्यक्ति 1244 रुपए का कर्जदार हो गया।
सरकार के सामने चुनौती यह भी है कि बाजार से तय लिमिट से ज्यादा कर्ज ले नहीं सकते। राज्य ने केंद्र से जीएसडीपी का 1% ज्यादा कर्ज लेने की अनुमति मांगी है। इसके बाद ही आधारभूत ढांचे से जुड़े काम शुरू हो पाएंगे। इधर, सड़कों की मरम्मत के लिए 500 करोड़ रुपए से ज्यादा की जरूरत थी जो नहीं मिल सके।
मेट्रो रेल के पहले चरण का काम 2023 में पूरा होना था, लेकिन इसके लिए 1400 करोड़ की जरूरत है, यह काम आगे बढ़ सकता है। हमीदिया के 2000 बेड का अस्पताल की डेटलाइन लगातार बढ़ती जा रही है। इस अस्पताल के निर्माण में 650 करोड़ रुपए की लागत अनुमानित है अब तक 475 करोड़ रुपए ही मिल सके हैं। इसलिए अस्पताल का काम अब तक अधूरा है।
कोविड पर खर्चा 1027 करोड़: कोरोना के इलाज पर 45 करोड़ मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से जारी किए, जो विभाग फ्रंट लाइन में थे, उनमें परिवार कल्याण विभाग का खर्च 419 करोड़, चिकित्सा शिक्षा का 119 करोड़, ऑटोनोमस हास्पिटल पर 88 करोड़ और मृतकों के परिजनों को मुआवजा और अन्य कामों पर 324 करोड़ खर्च।
कोरोना कर्फ्यू से आय 45 फीसदी तक घटी: राज्य सरकार को स्वयं के करों से अप्रैल-मई और जून के महीने में 50 से 55 फीसदी ही आय हो सकी। अप्रैल और मई के 40 दिनों के कोरोना कर्फ्यू से आय 45 फीसदी तक घटी। यानी इन तीन महीनों में सामान्य स्थिति में 15 हजार करोड़ रुपए राजस्व आना था, लेकिन महज 6500 करोड़ रुपए ही आए। फरवरी में अनुमान था कि 61481 करोड़ रुपए मिलेंगे, लेकिन मार्च-अप्रैल में अनुमान 46025 करोड़ करना पड़ा। वहीं राज्य सरकार को मिले 43373 करोड़ रुपए। इस तरह 2651 करोड़ रुपए कम मिले।

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