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राहुल बजाज का 83 साल की उम्र में निधन, जिनकी लीडरशिप में घर-घर तक पहुंचा था ‘हमारा बजाज’

मुंबई। बजाज के पूर्व चेयरमैन राहुल बजाज (Rahul Bajaj) का शनिवार को पुणे में निधन हो गया. वो 83 वर्ष के थे, वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे और इसी के वजह से उनका निधन हुआ. बजाज ऑटो (Bajaj Auto) के देश और दुनिया में पहचान दिलाने वाले राहुल बजाज को साल 2001 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था. उनका बजाज स्कूटर 80 के दशक में घर घर की पहचान बन चुका था और टीवी और रेडियो में बजने वाला विज्ञापन हमारा बजाज उनके ब्रांड की पहचान बना जो आज तक जारी है. आइये जानते हैं देश के इस उद्योगपति के सफल जीवन के बारे में जिसने भारत की ऑटो इंडस्ट्री (auto industries) को न सिर्फ दुनिया भर में पहचान दी साथ कई कारोबारियों के लिये प्रेरणा के स्रोत भी बने

1965 में संभाली ग्रुप की जिम्मेदारी
राहुल बजाज का जन्म 10 जून, 1938 को कोलकाता में मारवाड़ी कारोबार परिवार में हुआ था, बजाज परिवार और नेहरू परिवार में अच्छी जानपहचान थी . राहुल बजाज ने 1965 में बजाज ग्रुप की जिम्मेदारी संभाली. उनके कार्यकाल में बजाज ऑटो का टर्नओवर 7.2 करोड़ से 12 हजार करोड़ तक पहुंच गया और यह स्कूटर सेग्मेंट में देश की अग्रणी कंपनी बन गई. उन्होने 50 साल तक कंपनी की बागडोर अपने हाथों में रखी. 2005 में वो इस पद से हटे और अपने बेटे को बागडोर सौंप दी बजाज फिलहाल देश की अग्रणी ऑटो सेक्टर की कंपनी है. बजाज ऑटो को अपना नाम 1960 में मिला था और वो स्कूटर बनाने के कारोबार में इससे पहले से थी. राहुल बजाज के कारोबार संभालने के साथ बजाज ऑटो नई ऊंचाई पर पहुंची साल 2008 में उन्होने कंपनी के तीन हिस्से किये जिसमें एक होल्डिंग कंपनी के अलावा बजाज ऑटो और बजाज फिनसर्व शामिल हैं. अप्रैल 2021 में वो कंपनी के नॉन एग्जीक्यूटिव पद से हट गये.

घर घर की शान बना बजाज का स्कूटर
बजाज के स्कूटर वेस्पा के बाजार में आते ही वो आम लोगों के ट्रांसपोर्टेशन का अहम हिस्सा बन गया था. स्थिति ये थी कि तब बजाज के स्कूटर को लेने के लिये लंबी वेटिंग लगती थी. चेतक के साथ बजाज कंपनी भारतीयों के और करीब आ गया. राहुल बजाज के कार्यकाल के दौरान टूव्हीलर मार्केट के दो तिहाई से ज्यादा हिस्से पर बजाज ऑटो का कब्जा था. इस समय दूरदर्शन पर चलने वाले एड की टैगलाइन हमारा बजाज इतनी सफल हुई कि वो आज भी जारी है. हालांकि बजाज स्कूटर को पाना राहुल बजाज के लिये आसान नहीं था. 1968 में फिरोदिया परिवार के साथ उन्हें कानून लड़ाई लड़नी पड़ी और स्कूटर पर अपना हक हासिल किया. ये कदम उनके लिये गेमचेंजर साबित हुआ और बाकी सभी बाते अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है.

जीवन में कई बड़े सम्मान हासिल किये राहुल बजाज ने
एक सफल कारोबारी के रूप में खुद को स्थापित करने के साथ राहुल बजाज ने कई बड़े सम्मान अपने नाम किये. 2001 में उन्हें इंडस्ट्री में शानदार योगदान के लिये पद्म विभूषण मिला. इसके अलावा उन्हे फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान भी मिला. राहुल राज्यसभा के सदस्य भी रहे. इसके अलावा वो सीआई आई के अध्यक्ष भी चुने गये. 2017 में राहुल बजाज को राष्ट्रपति के द्वारा भी सम्मानित किया गया.फोर्ब्स की साल 2016 की रैकिंग में वो 2.4 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया में 722वें स्थान पर थे.

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