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कैसे होता है सोशल मीडिया अकाउंट हैक? जानें इससे बचने के तरीके

भोपाल। सेलेब्रिटी, बिजनेसमैन या राजनेता का सोशल मीडिया अकाउंट हो जाता है । एक सर्वे की मानें, तो दुनियाभर में सोशल मीडिया हैकिंग के मामले बढ़े हैं। इनमें 22% इंटरनेट यूजर्स के सोशल मीडिया अकाउंट हैक किए जा चुके हैं। 14% ऐसे यूजर्स हैं, जिनका सोशल मीडिया अकाउंट एक से ज्यादा बार हैक किया जा चुका है।
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हैकर्स किन तरीकों से करते सोशल मीडिया अकाउंट हैक? बैंगलुरु में रहने वाले साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट अविनाश जैन कहते हैं कि सभी सोशल मीडिया अकाउंट को हैक करने का तरीका हैकर्स का एक जैसा ही होता है। वह हैकर्स के हैक करने के दो तरीकों की जानकारी देते हैं।

इन दो गलतियों का फायदा उठाते हैं हैकर्स

1. पहला: टेक्नीकल फ्लॉस (Technical Flaws)

एक्सपर्ट कहते हैं कि आपके सोशल मीडिया अकाउंट, जैसे- फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और लिंक्डइन होते हैं। यूजर्स इन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सोशल और प्रोफेशनल तौर पर लोगों से जुड़ने के लिए करते हैं। इन दो गलतियों की वजह से हैकर्स अकाउंट हैक कर सकते हैं। पहली तो अगर सोशल मीडिया की एप्लीकेशन में किसी तरह का लूपहोल होता है, तो इन्हीं टेक्नीकल फ्लॉस का फायदा हैकर्स उठाते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया की कंपनियों के पास अच्छे टेक्नीकल प्रोफेशनल की टीम होती हैं, लेकिन इसके बावजूद भी हैकर्स टेक्नीकल लूपहोल निकाल ही लेते हैं।
2. दूसरा- फिशिंग ट्रेप (Phishing Trap)

एक्सपर्ट के मुताबिक, दूसरी गलती जिसका फायदा हैकर्स उठाते हैं। वह यूजर्स की गलतियां ही होती हैं। इसमें कई तरह से हैकर्स लोगों की ID हैक कर सकते हैं। इसको ऐसे समझ सकते हैं कि हैकर्स कॉल या मैसेज करके आपसे फिशिंग लिंक शेयर कर सकते हैं। जैसे ही आप इस लिंक पर क्लिक करेंगे, तो आप फेसबुक, ट्विटर जैसी दिखने वाली साइट पर जा सकते हैं। इस पर वे लॉगिन करने को कहेंगे। अगर उनके झांसे में आकर लॉगिन करते हैं, तो हैकर्स अकाउंट का ID और पासवर्ड चुरा सकते हैं। उन्हें हैक करने में आसानी हो सकती है। कई बार प्राइवेसी सेटिंग बदलने के नाम पर भी हैकर्स OTP मांग सकते हैं।

हैकिंग को कैसे रोक सकते हैं?
एक्सपर्ट्स सोशल मीडिया पर हैकिंग से बचने के लिए सबसे ज्यादा यूजर्स को जागरुक रहने की सलाह देते हैं। वह कहते है कि किसी के साथ अपनी सोशल मीडिया अकाउंट की डिटेल शेयर करने से बचें। अगर कोई अनजान नंबर से आपके मोबाइल पर फोन करके OTP मांगता हैं, तो न दें। फिशिंग लिंक का ध्यान रखें। ऐसे लिंक पर ही क्लिक करें, जो ऑथेंटिक हो। कंपनियों को भी अपनी एप्लीकेशन की रेगुलर टेस्टिंग एंड ऑडिटिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर की टेस्टिंग IT प्रोफेशनल से कराते रहना चाहिए। इसकी चेकिंग के लिए थर्ड पार्टी IT कंपनियों से भी रिव्यू कराते रहना चाहिए।

प्राइवेसी को लेकर भारत में किसी तरह का कानून है?
एक्सपर्ट की मानें तो डेटा प्रोटेक्शन को लेकर इंडिया में फिलहाल किसी तरह का कानून नहीं बना है। 11 दिसंबर 2019 को मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री ने पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल (PDP) संसद में पेश किया था। जो अभी तक पेंडिंग है। हालांकि, NCPI ने प्राइवेसी को लेकर गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत देश का डेटा देश में ही रहना चाहिए, उसे बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है। वहीं, यूरोप में डेटा प्रोटेक्शन को लेकर GDPR नाम से कड़ा कानून बनाया गया है।

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