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रो पड़े लालू यादव, बोले – तेजस्वी, राबड़ी नहीं होते तो रांची में ही मर जाता

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सोमवार को अपना 25 वां स्थापना दिवस मना रहा है। पार्टी के सिल्वर जुबली समारोह में पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने 30 मिनट तक राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी और राबड़ी नहीं होते, तो मैं रांची में ही खत्म हो जाता। वहीं, जनता से वादा करते हुए कहा कि जल्द पटना आएंगे और सभी से मुलाकात करेंगे।

लालू के भाषण में चुनाव के दौरान जेल में रहने का मलाल भी नजर आया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान वह जेल में तड़पते रहे गए, बाहर नहीं आ सके। हालांकि, तेजस्वी से उनकी बात होती रहती थी। उन्होंने कहा, ‘तेजस्वी को चिंता नहीं करनी चाहिए। राजद का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। भविष्य में हम देश को आगे बढ़ाएंगे।’ RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद ने केंद्र और नीतीश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मेरा राज जंगलराज नहीं, गरीबों का राज था।

भाषण में लालू ने दोनों बेटों की तारीफ की
तेज प्रताप यादव और तेजस्वी की तारीफ करते हुए कहा कि तेज प्रताप ने बहुत अच्छा भाषण दिया। उसकी बातों में दम है। तेजस्वी को बहुत कम उम्र में बिहार ने अपना नेता मान लिया है। वे बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं। सरकार पर हमला बोलते हुए लालू ने कहा- ‘देश में आर्थिक संकट है। सामाजिक ताने-बाने को खत्म किया जा रहा है। अयोध्या के बाद मथुरा… ये क्या नारा है। देश में क्या चाहते हैं? सत्ता के लिए लोगों को देश में तबाह करना चाहते हैं। संसद भी नहीं चल पाती है। इनको देखना चाहिए। लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि हम मिट जाएंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे।’

बेरोजगारी को लेकर आंदोलन करेंगे तेजस्वी
पार्टी के कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि लालू प्रसाद न कभी झुके थे, ना झुकेंगे। उसी तरह तेजस्वी यादव भी कभी नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बेरोजगारी के मुद्दे पर बहुत बड़ा आंदोलन करेंगे। लालू प्रसाद ने सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी, वह आर्थिक न्याय के सवाल पर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के मंत्री और विधायक ही सरकार पर आरोप लगा रहे हैं।

लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने कहा, ‘जिस समय पार्टी की स्थापना हुई थी, हम सभी बच्चे थे। जिस BN कॉलेज में मेरे पिताजी पढ़ते थे, उसी BN कॉलेज में मैंने एडमिशन लिया और उसी बेंच पर बैठना शुरू किया। हम जब बोलते हैं तो बहुत सारे लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं। हमारे पिताजी के भाषण का भी लोग मजाक उड़ाते थे।’

नीतीश की तुलना बहादुर शाह जफर से
राज्यसभा सांसद और राजद के प्रवक्ता मनोझ झा ने स्थापना दिवस पर संकल्प पत्र पढ़ा। कहा, ‘हम गैर लोकतांत्रिक शक्तियों को खत्म करने का संकल्प लेते हैं।’ वहीं, ​​​​​​राजद नेता शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार की तुलना बहादुर शाह जफर से की। उन्होंने कहा कि जफर की पूरी मिल्कियत लाल किले के अंदर तक थी। नीतीश कुमार एक अणे मार्ग तक सीमित हो गए हैं। राजद के वरिष्ठ नेता आलोक मेहता ने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों का जवाब सोशल मीडिया से दिया जाएगा। इसलिए हर कार्यकर्ता सोशल मीडिया के मामले में पूरी जानकारी रखें।
पटना में पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने रामविलास पासवान की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी रामविलास को श्रद्धांजलि दी। लालू प्रसाद साल 1997 में जनता दल से अलग हुए थे और अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बनाई थी। यह पार्टी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी है और बड़ा जनाधार भी रखती है, जिसकी वजह इसका ‘MY’ समीकरण है। इसमें 16 फीसदी यादव और 16 फीसदी मुसलमानों का तगड़ा वोट बैंक है।

चिराग पर भी दिखेगा राजद का रुख
लोजपा में इन दिनों दो गुट हो गए हैं। एक गुट के नेता स्व. रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान हैं और दूसरे गुट के पशुपति कुमार पारस। चिराग पासवान खुद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हनुमान बताते हैं और दूसरी तरफ लालू प्रसाद सांप्रदायिकता के सवाल पर नरेन्द्र मोदी का विरोध करते रहे हैं।
रामविलास पासवान की जयंती मनाने के बड़े राजनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं। चिराग और तेजस्वी दोनों एक दूसरे को भाई भी कहते रहे हैं। सबसे खास बात यह कि चिराग और तेजस्वी के साझा राजनीतिक दुश्मन नीतीश कुमार हैं।

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