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MP : EXCLUSIVE 15 सीटों पर कांग्रेस तो 6 सीटों पर बीजेपी दिख रही मजबूत, सात सीटों पर कांटे की टक्कर

भोपाल। मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर 3 नवंबर को होने जा रहे उपचुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने पूरा जोर लगा दिया है। बीजेपी की तरफ से सीएम शिवराज, सिंधिया के अलावा प्रदेश के सभी कद्दावर नेता मैदान में हैं. वहीं कांग्रेस की तरफ से पूरी कमान कमलनाथ ने अपने हाथ में ले रखी है. लेकिन देखने लायक बात यह है कि अकेले कमलनाथ बीजेपी के सभी धुरंधरों पर भरी पड़ रहे हैं। 15 सीटों पर कांग्रेस मजबूत स्थिति में दिख रही है तो 6 सीटों पर बीजेपी आगे दिख रही है। सात सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा दिख रहा है.

अशोकनगर : कांग्रेस का पलड़ा भारी, भाजपा फंसी संकट में

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए जजपाल सिंह जज्जी कमजोर नजर आ रहे हैं। उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यहां बीजेपी में जबरदस्त भीतरघात का सामना करना पड़ रहा है। दलबदल को लेकर कांग्रेस हमलावर है। यहां सिंधिया का जादू नहीं चल पा रहा है। सीएम शिवराज भी यहां फीके साबित हो रहे हैं। मतदाताओं का रुझान कांग्रेस की तरफ ज्यादा दिख रहा है। बीजेपी के सूत्र भी इस सीट पर कांग्रेस की मजबूत स्थिति को स्वीकार कर रहे हैं।

भांडेर: कांग्रेस के फूलसिंह बरैया अब मजबूत

भाजपा की रक्षा सिरोनिया के मुकाबले कांग्रेस के फूलसिंह बरैया यहां मजबूत नजर आ रहे हैं। पर दलित वोटों के साथ मुस्लिम वोट भी एकजुट होते दिख हैं. इससे कांग्रेस काफी उत्साहित है. बीजेपी की रक्षा के पति के व्यवहार को लेकर लोगों में नाराजगी दिख रही है। वहीं, कांग्रेस के लिए पूर्व मंत्री महेंद्र बौद्ध चिंता का सबब बने हुए हैं। बरैया को लेकर सामान्य वर्ग में नाराजगी देखि जा रही है। लेकिन बरैया का यहां जनाधार मजबूत है. ऐसे में कहा जा सकता है कि कांग्रेस के बरैया इस सीट को निकाल सकते हैं।

पोहरी : सीएम शिवराज की चार सभाओं के बाद कांग्रेस आगे

भाजपा ने यहां सुरेश धाकड़ को उतारा है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान यहां चार सभाएं कर चुके हैं। इसके बाद भी पार्टी घबराई हुई है. क्योंकि लोगों में अब शिवराज का वो जादू नहीं दिख रहा, जो पहले था। लेकिन सुरेश धाकड़ का जनाधार ठीकठाक है। इस कारण बीजेपी इस सीट पर खुद को मजबूत मानकर चल रही है. कांग्रेस ने यहां से हरिवल्लभ शुक्ला को टिकट दिया है। शुक्ला को सामान्य वर्ग का समर्थन मिल रहा है। पूरे दृश्य को देखकर लगता है कि यहां मुकाबला बहुत कांटे का है।

करैरा : कांग्रेस मजबूत तो बीजेपी कमजोर

इस सीट पर कांग्रेस ने बीजेपी पर काफी बढ़त बना रखी है। यहां दलबदल का मुद्दा दोनों दलों को परेशान कर रहा है। भाजपा बार बार रणनीति बना रही है लेकिन सब विफल होती दिख रही है । भाजपा से जसवंत जाटव को मैदान में उतारा है । जाटव को लेकर लोगों में नाराजगी दिख रही है। शिवराज व सिंधिया असर होता नहीं दिख रहा. कांग्रेस को यहां से काफी उम्मीदें दिख रही हैं. कमलनाथ की सभा में शिवराज की सभा में ज्यादा भीड़ दिखी। बड़ी बात कि इस सीट पर सामान्य वर्ग के मतदाता बीजेपी से नाराज हैं। इसका खामियाजा बीजेपी को उठाना पड़ सकता है।

मुंगावली : कांग्रेस काफी आगे, बीजेपी संकट में

कांग्रेस से लगातार दो बार चुनाव जीत चुके ब्रजेंद्र सिंह यादव अब भाजपा से भाग्य आजमा रहे हैं। यादव बहुल सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस के कन्हई राम लोधी से है। बीजेपी के ब्रजेंद्र सिंह मुश्किल में दिख रहे हैं । यादव बहुल सीट होने के बाद भी ब्रजेंद्र सिंह यादव कमजोर साबित हो रहे हैं. सीएम शिवराज व सिंधिया का असर इस क्षेत्र में कम है. बूथ मैनेजमेंट में भले ही बीजेपी कुछ भी दावे करे लेकिन रुझान कांग्रेस की तरफ इशारा कर रहे हैं।

बमोरी : कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी मजबूत

भाजपा प्रत्याशी और मंत्री महेंद्रसिंह सिसौदिया की हालत मजबूत दिख रही है। वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे. उन्होंने बीजेपी के बीच जगह बनाने में कामयाबी मिलती दिख रही है। बीजेपी सरकारकार में मंत्री रहे और पिछले विधानसभा चुनाव में नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ चुके कांग्रेस के केएल अग्रवाल काफी जोर लगा रहे हैं. इसके बाद भी अग्रवाल की स्थति बीजेपी के सिसौदिया के सामने कमजोर दिख रही है। बीजेपी का खेमा इस सीट को लेकर आश्वस्त दिख रहा है।

ग्वालियर पूर्व : कांग्रेस मजबूत, बीजेपी कमजोर

कांग्रेस से भाजपा में आए मुन्नालाल गोयल के सामने कांग्रेस ने सतीश सिकरवार हैं. शुरू में यहां मुकाबला कड़ा दिख रहा था। लेकिन जैसे जैसे प्रचार आगे बढ़ा तो कांग्रेस मजबूत होती गयी. यहां भी दलबदल को लेकर दोनों दलों में घबराहट है। गोयल का स्वाभाव सरल है जो उनका मजबूत पक्ष है लेकिन सिकरवार ने आक्रामक प्रचार कर अपनी स्थति मजबूत कर ली है. सिकरवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं का समर्थन हासिल है जो गोयल के लिए मुसीबत का सबब बनता दिख रहा है। सिकरवार का पूरा खानदान सालोंसाल से बीजेपी के लिए काम करता आ रहा है, अब वे सब सिकरवार के लिए जोर लगा रहे हैं. जिसका फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है।

ग्वालियर : भाजपा मजबूत लेकिन भीतरघात का डर

कांग्रेस ने यहां से सुनील शर्मा को टिकट दिया गया। भाजपा से मंत्री प्रद्युम्न तोमर उम्मीदवार हैं। कमलनाथ सरकार के दौरान तोमर मंत्री थे और अब बीजेपी सरकार में भी मंत्री हैं. तोमर को सिंधिया का बेहद खास माना जाता है. सिंधिया ने तोमर के लिए सब कुछ झोंक रखा है. तोमर जनता के बीच जाते रहते हैं जिसका फायदा उन्हें मिलता दिख रहा है। और बीजेपी मजबूत दिख रही है। पिछले चुनाव में यहां से चुनाव हारे जयभान सिंह पवैया की नाराजगी अभी तक बीजेपी ठीक नहीं कर पायी है. हालाँकि पवैया दिखने के लिए बीजेपी का समर्थन करते दिख रहे हैं लेकिन उनके समर्थकों में इस बात को लेकर बेचैनी है कि उनका क्या होगा ? भीतरघात से आशंकित बीजेपी ने यहां पवैया को साधने का प्रयास किया है। लेकिन पवैया मन से तोमर का साथ नहीं दे रहे हैं.

डबरा : बीजेपी की इमरती देवी आगे, कांग्रेस प्रत्याशी कमजोर

कांग्रेस से भाजपा में आई मंत्री इमरती देवी मजबूत दिख रही हैं. इमरती देवी के लिए सिंधिया पूरा जोर लगा रहे हैं. कांग्रेस से उम्मीदवार सुरेश राजे कमजोर दिख रहे हैं. कमलनाथ के आइटम वाले बयान को लेकर राजनीति दो दिन गरमाई लेकिन बीजेपी इस मुद्दे को बनाने में विफल रही क्योंकि दो दिन बाद ही इमरती देवी ने कमलनाथ के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। इससे सहानुभूति पाने की कोशिश बीजेपी की फ़ैल हो गयी. इसके बाद भी बीजेपी इस सीट पर मजबूत दिख रही है।

मुरैना : यहां मुकाबला त्रिकोणीय

बसपा के उम्मीदवार रामप्रकाश राजौरिया के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। राजौरिया की छवि अच्छी है। इस सीट पर कांग्रेस से भाजपा में आए रघुराज कंसाना के सामने कांग्रेस ने राकेश मावई को उतारा है। ऐसे में गुर्जर वोट बंट सकता है। यह बात कांग्रेस और भाजपा दोनों को परेशान कर रही है, क्योंकि ब्राह्मण उम्मीदवार राजौरिया बसपा से उतरे हैं, जिसे बड़ी संख्या में दलित वोट भी मिलते आए हैं।

दिमनी : भाजपा मुश्किल में, कांग्रेस भारी

इस सीट पर भाजपा की मुश्किल में है। भाजपा के प्रत्याशी गिर्राज दंडोतिया के खिलाफ ठाकुर जाति है. ठाकुरों में कांग्रेस प्रत्याशी रवींद्र तोमर के प्रति समर्थन बढ़ता जा रहा है। दलित वोट भी कांग्रेस तरफ जाता दिख रहा है और ब्राह्मण वोटर्स भी बीजीप के दंडोतिया से नाराज बताया जा रहा है। कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में दंडोतिया ने इलाके के लिए कुछ नहीं किया, जिससे वोटर्स में नाराजगी है. हाल ही में कमलनाथ की लाश उठाने जैसा आपत्तिजनक बयान देकर दंडोतिया ने अपनी हालत और खराब कर ली। सिंधिया पूरा जोर लगा रहे हैं लेकिन माहौल कांग्रेस के पक्ष में दिख रहा है।

सुमावली : मुकाबला कडा है, गुर्जर वोट बैंक के भरोसे बीजेपी

यहां दोनों ही पार्टियां दलबदल के मुद्दे को लेकर परेशान हैं. दोनों को भितरघात का डर है। कांग्रेस से भाजपा में आए मंत्री एंदल सिंह कंसाना के सामने कांग्रेस ने भाजपा से आए अजबसिंह कुशवाह को उतारा है। इस सीट पर गुर्जर वोट बैंक निर्णायक है। कंसाना को गुर्जर वोट बैंक पर भरोसा है। लेकिन अन्य जातियां उनसे नाराज दिख रही हैं. ऐसे में यहां मुकाबला काफी रोचक हो गया है। शुरुआत में बीजेपी आगे दिख रही थी लेकिन जैसे जैसे प्रचार आगे बढ़ा तो मुकाबला कांटे का हो गया.

जौरा : भीतरघात से परेशान बीजेपी, कांग्रेस भारी
पूर्व विधायक बनवारीलाल शर्मा के निधन से खाली हुई सीट पर कांटे का मुकाबला है। भाजपा के पूर्व विधायक सूबेदारसिंह के सामने कांग्रेस ने पंकज उपाध्याय को उतारा है। पंकज नया चेहरा हैं, जिसके प्रति लोगों में उनके प्रति रूचि बढ़ती दिख रही है। बीजेपी के सूबेदार को स्थानीय स्तर भाजपा संगठन का साथ नहीं मिल रहा, जो उनकी मुश्किलें बढ़ा रही हैं। जातिगत समीकरण के लिहाज से कांग्रेस के पंकज बीजेपी के सूबेदार पर भारी पड़ रहे हैं.

अंबाह : निर्दलीय के कारण ने भाजपा प्रत्याशी संकट में

निर्दलीय उम्मीदवार अभिनव छारी ने भाजपा को संकट में डाल रखा है. इसका फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है। बसपा से आए सत्यप्रकाश सखवार को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाकर जातिगत समीकरण साधने की कोशिश की है। सामने बीजेपी के कमलेश जाटव हैं, जिन्हें भितरघात से नहीं, बल्कि बगावत से खतरा है। सपा के उम्मीदवार पूर्व विधायक बंसीलाल जाटव ने भाजपा को समर्थन कर दिया है, लेकिन निर्दलीय छारी के कारण राह आसान नहीं हैं।

मेहगांव : मुकाबला बेहद कड़ा
यहां से हेमंत कटारे को कांग्रेस ने टिकट दिया है। यहां ठाकुर और ब्राह्मण वोट निर्णायक माने जाते हैं। भाजपा से ओपीएस भदौरिया व कांग्रेस के कटारे के बीच मुकाबला काफी कड़ा है. हालांकि बीजेपी यहां रणनीतिक रूप से आगे है. बीजेपी मजबूत संगठन के सहारे जीत के दावे कर रही है. शुरुआत में बीजेपी आगे भी दिखी लेकिन अब यहां कांटे का संघर्ष दिख रहा है।

गोहद : मुकाबला किसी के लिए आसान नहीं

इस सीट पर ठाकुर बहुल 84 गांवों की भूमिका अहम् रहती है. कांग्रेस के पूर्व मंत्री गोविंद सिंह इसी समीकरण को वोट में बदलने के लिए लगे हैं। इस कारण कांग्रेस को लग रहा है कि उसकी नैया पार हो जाएगी। कांग्रेस प्रत्याशी मेवाराम जाटव को ठाकुर जाति का समर्थन मिल गया तो कांग्रेस यहां से निकल सकती है. लेकिन बीजेपी संगठन यहां मजबूत है, जिसके सहारे कांग्रेस से भाजपा में आए रणवीर जाटव जीतने के दावे कर रहे हैं. बीजेपी के लिए बड़ी मुसीबत भीतरघात को लेकर है. मजबूत संगठन के बाद भी बीजेपी में घबराहट दिख रही है. कुल मिलकर दोनों दलों के लिए यहां राह आसान नहीं है।

हाटपीपल्या : भीतरघात से परेशान बीजेपी, कांग्रेस मजबूत

कांग्रेस से भाजपा में आए मनोज चौधरी की स्थिति दलबदल के मुद्दे को लेकर कमजोर है. सीएम शिवराज की सभा के बाद भी हालात बीजेपी के लिए ठीक नहीं दिख रहे. पिछले चुनाव में मनोज से हारे पूर्व मंत्री दीपक जोशी और उनके समर्थक मन से नहीं जुड़े हैं। जोशी फैक्टर बीजेपी को परेशान किये है. यहां सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति, खाती, राजपूत, पाटीदार और सेंधव समाज निर्णायक माने जाते हैं। जोशी समर्थकों ने मनोज चौधरी को स्वीकार नहीं किया है. इससे यहां बीजेपी को हार का डर सता रहा है।

सांवेर : सिलावट से नाराजगी के बीच कांटे का मुकाबला
कांग्रेस से भाजपा में आए मंत्री रहे तुलसी सिलावट के लिए सिंधिया के अलावा शिवराज ने पूरा जोर लगा रखा है। इसके बाद भी सिलावट कुछ कमजोर दिख रहे है. पूरे क्षेत्र में कांटे की टक्कर दिख रही है। बीजेपी के नेता इस सीट को लेकर डरे हुए हैं इसलिए यहां अब तक यहां मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की पांच सभाएं तो सिंधिया की तीन सभाएं हो चुकी हैं. इसके बाद भी कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्‌डू कांटे की टक्कर दे रहे हैं. बीजेपी को यहां अंदरूनी विरोध का डर सता रहा है। तुलसी सिलावट को हराने के लिए कांग्रेस में मंत्री रहे जीतू पटवारी महीनेभर से इलाके में डेरा डाले हुए हैं।

बदनावर : बीजेपी कुछ मजबूत, कांग्रेस कुछ कमजोर

शुरुआती दौर में राजवर्धनसिंह दत्तीगांव को देखकर लग रहा था कि बीजेपी यहां से एकतरफा जीत हासिल कर लेगी लेकिन अब मुकाबला किसी के लिए आसान नहीं दिख रहा. हालाँकि बीजेपी कुछ मजबूत दिख रही है. लेकिन जैसे-जैसे चुनावी पारा चढ़ता गया, कांग्रेस के कमल पटेल मुकाबले में आ गए। कांग्रेस से भाजपा में आए राजवर्धन सिंह को बीजेपी नेताओं का पूरा समर्थन नहीं मिल रहा जो एक चिंता का विषय है. लेकिन बीजेपी यहां फिर भी कांग्रेस पर भरी दिख रही है.

सुवासरा: बीजेपी के डंग मजबूत

भाजपा के हरदीप सिंह डंग मजबूत स्थिति अच्छी दिख रही है । डंग की छवि मिलनसार नेता के रूप में है। सरपंच से शुरुआत की थी, जिस कारण जमीनी पकड़ मजबूत है। कांग्रेस के राकेश पाटीदार को यहां भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। किसान आंदोलन के दौरान हुई आगजनी के लिए भी पोरवाल समाज इनसे खासा नाराज है।

आगर : कांग्रेस के विपिन मजबूत

भाजपा के मनोज ऊंटवाल कमजोर साबित हो रहे हैं। विधायक पिता मनोहर ऊंटवाल के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर बेटे को सहानुभूति के वोट मिलेंगे, यह मानकर भाजपा ने टिकट दिया था, लेकिन अब ऐसा लग नहीं रहा है। मनोज की जमीनी सक्रियता कभी रही नहीं है, इस कारण उन्हें कदम-कदम पर मुश्किलें आ रही हैं। कांग्रेस के विपिन वानखेड़े का लगातार संपर्क उनकी राह आसान बना रहा है।

नेपानगर : भाजपा से नाराजगी, कांग्रेस की स्थिति बेहतर

कांग्रेस से दो बार चुनाव हार चुके रामकिशन पटेल की स्थिति मजबूत दिख रही है। विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण भाजपा में आई सुमित्रा कास्डेकर से लोग नाराज दिख रहे हैं। यहां दोनों प्रत्याशी कोरकू समाज के हैं और ये ही जीत-हार तय करते हैं। यहां दलबदल का मुद्दा हावी होता दिख रहा है.
2018 के चुनाव में सुमित्रा से हारी भाजपा की मंजू दादू भी दिखावे के लिए ही साथ दिख रही हैं।

मांधाता : कांग्रेस मजबूत, भाजपा परेशान

भाजपा प्रत्याशी नारायण पटेल ने 2018 के चुनाव में 1236 वोट से जीत हासिल की थी। इस बार उनके सामने कांग्रेस के राजनारायण के बेटे उत्तम पाल सिंह मैदान में हैं, जो इस समय मजबूत नजर आ रहे हैं। यहां भाजपा को पसीना बहाना पड़ रहा है। शिवराज सिंह चौहान तीन सभा कर चुके है। सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर भी सभाएं कर चुके हैं। इसके बाद भी कांग्रेस बहुत आगे दिख रही है बीजेपी से. 15 साल से सत्ता से बाहर रहने के बावजूद राजनारायण सिंह का गांव-गांव में संपर्क रहा है। जिसका फायदा उनके बेटे को इस चुनाव में मिल सकता है।

ब्यावरा: कांग्रेस कमजोर, भाजपा अच्छी स्थिति
कांग्रेस के गोवर्धन दांगी के निधन से खाली हुई इस सीट पर भाजपा अच्छी स्थिति में है। भाजपा प्रत्याशी नारायण पवार 2018 में एक हजार से भी कम वोटों से हारे थे, लेकिन उनका सामना इस बार कांग्रेस के ऐसे प्रत्याशी रामचंद्र दांगी से है, जो जमीनी पकड़ के मामले पीछे हैं। भाजपा संगठन यहां पूरी मुस्तैदी से लगा हुआ है, इसके मुकाबले कांग्रेस का बूथ मैनेजमेंट कमजोर दिख रहा है।

सांची : भाजपा के प्रभुराम की हालत खराब

कांग्रेस से भाजपा में आए प्रभुराम चौधरी के सामने कांग्रेस के मदन चौधरी हैं। शेजवार की नाराजगी के कारण भाजपा को भीतरघात का खतरा है और कांग्रेस इसे भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है। प्रभुराम कई बार ये शिकायत भोपाल के प्रदेश मुख्यालय में कर चुके हैं कि उन्हें बीजेपी कार्यकर्ताओं का समर्थन नहीं मिल रहा। आलाकामन ने शेजवार को बुलाकर नसीहत भी दी. सीएम शिवराज यहां चार सभाएं कर चुके हैं। इसके बाद भी बीजेपी की हालत यहां बेहद खस्ता दिख रही है.

सुरखी : मुकाबला रोचक, बीजेपी की भीतरघात का डर
कांग्रेस प्रत्याशी पारूल साहू को कांग्रेस से भाजपा में आए गोविंद राजपूत टक्कर दे रहे हैं। राजपूत इस क्षेत्र में हमेशा मजबूत रहे हैं लेकिन इस बार मुकाबला आसान नहीं है। यहां की जिम्मेदारी बीजेपी ने मंत्री भूपेंद्र सिंह को सौंप रखी है. लेकिन बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता राजपूत को पचा नहीं पा रहे हैं. यही सीन कांग्रेस में है बीजेपी से कांग्रेस में आयीं पारुल को कांग्रेस के लोग मन से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. दलबदल के कारण दोनों दल समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बाद भी राजपूत आगे दिख रहे हैं. हालाँकि पारुल को महिलाओं का समर्थन मिल रहा है.

बड़ा मलहरा : कांग्रेस मजबूत, बीजेपी की हालत खस्ता

कांग्रेस की साध्वी रामसिया भारती की स्थिति यहां मजबूत नजर आ रही है। पार्टी बदलने के कारण भाजपा के प्रद्युम्न सिंह लोधी से समाज के ही लोग नाराज दिख रहे हैं। साध्वी छह साल से भागवत कथा कर रही हैं, जिस कारण क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत है। 5 हजार लोगों ने साध्वी से दीक्षा ली है जो उनके पक्के वोटर होंगे।

अनूपपुर: भाजपा के बिसाहूलाल की राह आसान नहीं

भाजपा के मंत्री बिसाहूलाल साहू की स्थिति पिछले चुनावों के मुकाबले कमजोर है। कांग्रेस से यहां विश्वनाथ मैदान में हैं। दोनों प्रत्याशी गोंड समाज से हैं। इस सीट पर गोंड और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं। यहां मुकाबला कांटे का है

 

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